
E9 News, श्रीनगर (साजिद मनुवार्डी) ‘धरती का स्वर्ग’ कहे जाने वाले कश्मीर घाटी को ना’पाक’ नजर लग गई है। घाटी में पाकिस्तान की फंडिंग से आए दिन होने वाली पत्थरबाजी और हिंसा से लोगों में दहशत है। इसका खामियाजा पर्यटन से अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले लोगों को भी भुगतना पड़ रहा है। हिंसा और तनाव के कारण इस पीक सीजन में पर्यटकों की संख्या घट गयी है। एक अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के अनुसार, वहां के होटलों में केवल 20 फीसदी कमरे ही भरे हैं और अडवांस बुकिंग भी कम हो रही है। वहीं पिछले साल इस समय तक 70 से 80 फीसदी तक कमरे बुक रहते थे। अगर स्थिति ऐसी ही रही तो फिर पर्यटन के सहारे गुजर-बसर करने वाले लोगों को क्या होगा? देश में आतंकवाद से पीडि़त राज्यों में पर्यटकों की संख्या घटी है यानी आतंकवाद का असर आम निवासियों के साथ ही पर्यटकों पर भी पड़ा है। जुलाई 2016 में संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, बाकी राज्यों में 2014 के मुकाबले 2015 में पर्यटक बढ़े, लेकिन आतंकवाद प्रभावित राज्यों में जैसे जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़, मिजोरम में पर्यटकों की तादाद निराशाजनक रही है।
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